अक्षरम-2026 : रचनात्मकता का उत्सव
हरियाणा के हिसार स्थित Guru Jambheshwar University of Science and Technology में आयोजित ‘अक्षरम-2026’ केवल एक तीन दिवसीय महोत्सव नहीं था, बल्कि यह विचार, परंपरा और रचनात्मकता का एक जीवंत संगम बनकर सामने आया।
3 से 5 अप्रैल 2026 तक चले इस आयोजन ने भारतीय ज्ञान परंपरा, समकालीन विमर्श और सांस्कृतिक चेतना को एक सशक्त मंच प्रदान किया। इसमें 100 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें साहित्य, संवाद, कला, संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के विविध आयाम शामिल थे।
साहित्य, संवाद और संस्कृति का महोत्सव
‘अक्षरम’ का मूल उद्देश्य केवल एक उत्सव मनाना नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर बौद्धिक संवेदनशीलता, सांस्कृतिक जुड़ाव और रचनात्मक दृष्टि को मजबूत करना था।
इस दौरान—
- साहित्यिक चर्चाएँ
- कविता पाठ
- पुस्तक विमोचन
- व्यंग्य प्रस्तुतियाँ
- और सांस्कृतिक मंचन
जैसे कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों और अतिथियों को गहराई से जोड़ा। यह आयोजन “Festival of Literature, Dialogue and Culture” के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।
परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संतुलन
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अक्षरम-2026 की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहाँ लोक परंपरा और आधुनिक चिंतन दोनों को समान महत्व दिया गया।
हरियाणवी लोक नृत्य, भजन संध्या, लोक मेले और पारंपरिक कला प्रदर्शनियों के साथ-साथ AI, climate change, identity, ideology और सामाजिक समकालीन मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
इसने यह सिद्ध किया कि भारतीय संस्कृति स्थिर नहीं, बल्कि समय के साथ विकसित होती हुई जीवंत परंपरा है।
युवाओं के लिए सृजन का मंच
इस आयोजन की आत्मा विद्यार्थी रहे।
उन्हें केवल दर्शक नहीं, बल्कि—
👉 विचारक
👉 रचनाकार
👉 और संवादकर्ता
बनने का अवसर मिला।
राज्य विश्वविद्यालय के कलाकारों ने लाइव पेंटिंग, मूर्तिकला, फैशन शो, स्ट्रीट प्ले और संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से पूरे परिसर को रचनात्मक ऊर्जा से भर दिया।
साहित्य और राष्ट्र चेतना का संबंध
समापन समारोह में यह संदेश विशेष रूप से उभरा कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम है।
राज्यपाल के संबोधन में भी कहा गया कि साहित्य समानता, न्याय, करुणा, संवेदनशीलता और समावेशी समाज के निर्माण का सबसे प्रभावशाली साधन है। उन्होंने युवाओं से केवल ज्ञान के उपभोक्ता नहीं, बल्कि सृजनकर्ता बनने का आह्वान किया।
निष्कर्ष
‘अक्षरम-2026’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि विचार और संस्कृति के निर्माण केंद्र भी होते हैं।
जब शिक्षा, साहित्य, परंपरा और रचनात्मकता एक साथ आते हैं, तब समाज में नई चेतना जन्म लेती है।
इसीलिए कहा जा सकता है—
अक्षरम-2026 केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि रचनात्मक भारत की एक जीवंत झलक था।

