RSS : संगठित होती सज्जन-शक्ति

Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) को अक्सर केवल एक संगठन के रूप में देखा जाता है, लेकिन उसके कार्य का मूल उद्देश्य समाज की “सज्जन-शक्ति” को संगठित करना बताया जाता है।

सज्जन-शक्ति का अर्थ है—वे लोग जो समाज, राष्ट्र और संस्कृति के लिए सकारात्मक सोच रखते हैं और निस्वार्थ भाव से कार्य करना चाहते हैं। संघ का प्रयास इन्हीं शक्तियों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रहित में सक्रिय करना है।


सज्जन-शक्ति का विचार क्या है?

संघ के सरकार्यवाह Dattatreya Hosabale ने हाल की प्रतिनिधि सभा में इसे “Power of Good” यानी सज्जन शक्ति का समन्वय बताया। उनका कहना था कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए अच्छे लोगों का संगठित होना आवश्यक है।

यह विचार केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में गुणवत्ता, समरसता और जिम्मेदारी बढ़ाने से जुड़ा है।


शाखा: केवल संख्या नहीं, संस्कार का माध्यम

RSS की शाखा को अक्सर केवल दैनिक बैठक समझ लिया जाता है, जबकि उसका उद्देश्य व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक चेतना को विकसित करना है।

यहाँ स्वयंसेवकों में तीन प्रमुख भाव विकसित किए जाते हैं—

  • पूरे भारत को एकात्म दृष्टि से देखना
  • जाति और समुदाय से ऊपर उठकर समाज के लिए सोचना
  • “देश हमें देता है सब कुछ, हम भी कुछ दें” की भावना

संघ के अनुसार शाखा केवल संख्या बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की प्रक्रिया है।


पंच परिवर्तन और सामाजिक समरसता

संघ ने समाज परिवर्तन के लिए पाँच प्रमुख विषयों पर विशेष ध्यान दिया है, जिन्हें “पंच परिवर्तन” कहा जाता है—

  • सामाजिक समरसता
  • परिवार प्रबोधन
  • पर्यावरण संरक्षण
  • स्वदेशी जीवनशैली
  • नागरिक कर्तव्य बोध

इनके माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने और सज्जन शक्ति को सक्रिय करने का प्रयास किया जाता है।

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